Saturday, March 9, 2013

రెక్కలు ఇవ్వగలవా నాకు...?


రెక్కలు ఇవ్వగలవా నాకు...?  

 హిందీ  : ప్రొఫెసర్ .రిషభ్ దేవ్ శర్మ .
 తెలుగు : డా.పేరిశెట్టి శ్రీనివాసరావు. 


పొత్తాలు అడిగాను నేను  
పొయ్యి దొరికింది నాకు 
స్నేహితుడ్ని కోరాను నేను 
వరుడు దొరికాడు నాకు 

కలల్ని కోరాను నేను 
కష్టాలు వరించాయి నన్ను 
బంధాలు కోరాను నేను 
బంధనాలు దొరికాయి నాకు 

నిన్న భూమిని అడిగాను 
నేడు సమాధి దొరికింది నాకు 
ఆకాశాన్ని అడుగుతున్నాను నేను 
రెక్కలు ఇవ్వగలవా నాకు...?



 డా .  పేరిశెట్టి శ్రీనివాసరావు.
లెక్చరర్,పి.జి.విభాగము 
దక్షిణ భారత హిందీ ప్రచార సభ 
చిత్తూరు రోడ్ ,ఎర్నాకుళం (కేరళ)
సెల్ : 9989 242 343
ఈ -మెయిల్ : srperisetti@gmail.com
                  srperisetti@yahoo.com

Monday, April 9, 2012

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के दूरस्थ शिक्षा विभाग में व्यक्तिगत संपर्क व्याख्यानमाला उद्घाटित .

 हैदराबाद,०८अप्रैल २०१२.
आज यहाँ खैरताबाद स्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के लिए दूरस्थ शिक्षा विभाग के तत्वावधान में हिंदी भाषा और साहित्य के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तिगत संपर्क सह व्याख्यानमाला कार्यक्रम का उद्घाटन संपन्न हुआ. 


आठ दिन तक चलनेवाली व्याख्यानमाला कार्यक्रम का परिचय देते हुए विभागाध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने बताया कि दूरस्थ माध्यम के छात्र आंध्रप्रदेश के दूरदराज इलाकों से आते है जिन्हें इस प्रकार के कार्यक्रमों में गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है ताकि वे पाठ सामग्री के सूक्ष्म  पहलुओं से परिचित हो सकें.
                   

               उद्घाटन दीप दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा-आंध्र के सचिव एस.के हलेमनी ने प्रज्वलित किया तथा आगंतुकों का स्वागत दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. पी. श्रीनिवास राव ने किया उन्होंने बताया है कि यह संपर्क-व्याखानमाला हैदराबाद और विजयवाडा में एक साथ चलाई जा रही हैं तथा इसमें विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ.एम.वेंकटेश्वर, डॉ.ऋषभदेव शर्मा, डॉ.साहिराबानू बी बोरगल, डॉ.मृत्युंजय सिंह, डॉ.जी.नीरजा, डॉ.गोरखनाथ तिवारी, डॉ.पूर्णिमा शर्मा एवं डॉ.पी.श्रीनिवास राव साहित्य, भाषा, इतिहास एवं काव्यशास्त्र आदि विषयों पर स्नातकोत्तर छात्रों को संबोधित करेंगे. कोसनम नागेश्वर राव के धन्यवाद के साथ समारोह संपन्न हुआ.


हिंदी मिलाप समाचार


         
प्रस्तुति - डॉ .पी.श्रीनिवास राव.
सहायक निदेशक
दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद.


Monday, September 19, 2011

हिंदी दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी द्वारा वर्ष २०११ के लिए तेलुगु भाषी हिंदी युवा लेखक पुरस्कार डॉ.पी.श्रीनिवास राव जी को प्रदान किया गया है ....



हिंदी दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी द्वारा हिंदी भाषा के विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले  व्यक्तियों का सम्मान किया गया है.. जिसमें  वर्ष २०११ के लिए कडारु.मल्ल्या जी को पद्मभूषण  डॉ. मोटूरी सत्यनारायण पुरस्कार के अंतर्गत एक लाख रुपयें नकद पुरस्कार आन्ध्र प्रदेश राज्य के उपमुख्या मंत्री         श्री .दामोदर राजनरसिम्हा  एवं हिंदी अकादमी के अध्यक्ष श्री . लक्ष्मी प्रसाद जी ने प्रदान किया है ...



 तेलुगु भाषी हिन्दी युवा लेखक पुरस्कार के लिए पच्चीस हज़ार रुपये नकद पुरस्कार एवं ज्ञापिका  
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक श्री.पी .श्रीनिवास राव जी को प्राप्त हुआ है ..
इस अवसर पर 
गुरुवर श्री .कडारु मल्ल्या जी को एवं  श्री डॉ.पी. श्रीनिवास राव जी को हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!!


विडियो भाग 




.....चित्रावाली .....




स्वतंत्र वार्ता १५ सितम्बर ...




Tuesday, August 30, 2011

आंधप्रदेश राज्य हिंदी अकादमी साहित्य पुरस्कार २०११






आंधप्रदेश राज्य हिंदी अकादमी साहित्य पुरस्कार  २०११ 

पुरस्कारों के लिए हिंदी साहित्यकार चयनित!! 

युवा हिंदी लेखक पुरस्कार  के लिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निर्देशक 

Monday, June 20, 2011

अज्ञेय जन्मशती समारोह

अज्ञेय जन्मशती समारोह  के सन्दर्भ में हिंदी से तेलुगु में अनूदित कविता पठन!!!!
हिंदी मूल "सबेरे उठा तो "का तेलुगु अनुवाद 
video

Tuesday, May 3, 2011

दूरस्थ शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय में डॉ त्रिभुवन राय का विशेष व्याख्यान

"भारतीय दृष्‍टि से साहित्य की आत्मा रस है जिसका आधार मनुष्य के हृदय में स्थित विभिन्न भाव होते हैं। जन्मजात संस्कार के रूप में प्राप्‍त प्रेम और हास जैसे भाव ही परिपक्व होकर रस के रूप में अभिव्यक्‍त होते हैं। हमारे दार्शनिकों ने रस को आनंद रूप और रसानुभूति को ब्रह्‍म की अनुभूति के समक्ष माना है। इसके लिए यह भी स्पष्‍ट किया है कि रस का अधिकारी अथवा पात्र वह सामान्य मनुष्य होता है जिसके भीतर आस्वादन की आकांक्षा होती है। ऐसा सहृदय ही रस का मानसिक साक्षात्कार करता है और रसानुभूति के क्षण में अपनेपन, पराएपन और तटस्थता से परे निर्वैयक्‍तिकता जैसी चौथी स्थिति में रहता है। इस तनमयता से ही लोकोत्तरता प्राप्त होती है जिससे निर्मल मन वाले सहृदय को आनंद का अनुभव होता है। यह अवस्था चित्त के द्रवित होने की अवस्था होती है।"



 ये विचार मुंबई से पधारे वरिष्‍ठ काव्यशास्त्रीय विद्वान प्रो.त्रिभुवन राय ने यहाँ उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के अंतर्गत सक्रिय दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित विशेष व्याख्यानमाला के क्रम में ‘रसानुभूति का स्वरूप’ विषय पर दूरस्थ माध्यम के स्नातकोत्तर के अधयेताओं को संबोधित करते हुए प्रकट किए। विशेष व्याख्यान की अध्यक्षता प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने की तथा संचालन सहायक निदेशक डॉ.पेरिसेट्टि श्रीनिवास राव ने किया। 

                इस अवसर पर निदेशालय की ओर से अध्यक्ष और मुख्य वक्‍ता का सम्मान किया गया। व्याखान पर परिचर्चा में डॉ.पूर्णिमा शर्मा, डॉ.मृत्युंजय सिंह, डॉ.जी.नीरजा, डॉ.गोरखनाथ तिवरी, डॉ.साहिरा बानू, डॉ.लक्ष्मीकांतम, अकबर, संगीता, राज्यलक्ष्मी, हेमंता बिष्ट, संध्या रानी ने  सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई।






[प्रस्तुति -डॉ जी नीरजा ]

Monday, April 25, 2011

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में दूरस्थ शिक्षा का संपर्क कार्यक्रम उद्घाटित


हैदराबाद, 24.04.2011 (प्रेस विज्ञप्ति)।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा द्वारा संचालित दूरस्थ शिक्षा  निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय के तत्वावधान में आज यहाँ एम.ए. हिंदी और स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा के दूरस्थ माध्यम के अध्ययनकर्ताओं के लिए सातदिवसीय संपर्क कार्यक्रम-सह-व्याख्यानमाला का उद्घाटन समारोह सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में आयोजित किया गया।

दूरस्थ शिक्षा  निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. पी. श्रीनिवास राव ने यह जानकारी दी कि इस कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञ आंध्र प्रदेश  के अलग-अलग अंचलों से आए हुए छात्रों की अध्ययन संबंधी कठिनाइयों का समाधान करेंगे।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने की तथा संपर्क अधिकारी एस.के. हलेमनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों के तौर पर डॉ. मृत्युंजय  सिंह, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ. बलविंदर कौर, डॉ. जी. नीरजा, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. साहिराबानू बी. बोरगल, डॉ. लक्ष्मीकांतम और डॉ. शशांक  शुक्ल इस शैक्षणिक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं तथा छात्रगण रंगारेड्डी, वरंगल, प्रकाशम, कृष्णा आदि अंचलों से आए हुए हैं ।
उद्घाटन समारोह में सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भूमंडलीकरण के इस दौर में शिक्षा  के त्वरित और व्यापक प्रसार के लिए दूरस्थ माध्यम वरदान के समान है। आयोजन की सफलता में के. नागेश्वर  राव, सुरेश कुमार, जे. चेन्नकेशव और बलराम का विशेष   योगदान रहा।

चित्र परिचय 1: दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में दूरस्थ शिक्षा  संपर्क कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्वलन के अवसर पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा, एस.के. हलेमनी, डॉ. पी. श्रीनिवास राव, डॉ. गोरखनाथ तिवारी, डॉ.  मृत्युंजय  सिंह, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, डॉ. बलविंदर कौर और अन्य।

चित्र परिचय 2: दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में दूरस्थ शिक्षा  संपर्क कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित (बाएँ से) डॉ. बलविंदर कौर, डॉ. पी.श्रीनिवास राव, एस.के. हलेमनी, डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, के. नागेश्वर  राव एवं प्रतिभागी छात्रगण।
- पी. श्रीनिवास राव